कविता मंजरी; आत्मत्राण

कविता मंजरी; आत्मत्राण

रविन्द्रनाथ ठाकुर ने कविता ‘आत्मत्राण’ के माध्यम से आशावादी विचारों को प्रस्तुत किया है। जहाँ कठिन समय में अन्य लोग ईश्वर से दुःख को हर लेने की याचना करते हैं वही कवि याचना कर रहा है कि यदि जीवन में कभी कठिन समय आये तो उस से पार पाने का सामर्थ्य ईश्वर उन्हें प्रदान करें। रविंद्रनाथ ठाकुर का बांग्ला से हिंदी में अनुवाद आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी जी ने किया है।

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Source: CIET, NCERT