तोड़ो

तोड़ो

रघुवीर सहाय की कविता ‘तोड़ो’ एक उद्बोधनपरक कविता है। कवि ने मन की तुलना प्रकृति से करते हुए मनुष्य का सृजनात्मक होने पर बल दिया है। कवि विध्वंस के लिए नहीं उकसाता वरन सृजन के लिए प्रेरित करता है।

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Source: CIET, NCERT